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वंदे मातरम् के अपमान पर अब होगी कानूनी कार्रवाई, राष्ट्रपति मुर्मू ने संशोधन विधेयक को दी मंजूरी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और गरिमा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कानूनी कदम उठाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को ‘Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026’ यानी राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही यह विधेयक कानून बन गया है। नए कानून के तहत वंदे मातरम् के गायन को जानबूझकर रोकना या ऐसे कार्यक्रम में व्यवधान पैदा करना दंडनीय अपराध होगा।
इस संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत को भी वही वैधानिक संरक्षण देना है, जो पहले से राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ को Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत प्राप्त है। हालांकि, कानूनी तौर पर इसका अर्थ यह नहीं है कि वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गान का दर्जा दे दिया गया है। भारत का राष्ट्रीय गान जन गण मन ही है, जबकि वंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत है।
संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था विधेयक
‘Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026’ को सरकार ने संसद के मानसून सत्र में पेश किया था। राज्यसभा ने 29 जुलाई को इसे पारित किया था। विधेयक में 1971 के कानून में संशोधन कर राष्ट्रीय गीत को उसके दायरे में शामिल करने का प्रावधान किया गया।
मूल कानून राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान के अपमान से जुड़े मामलों में कानूनी प्रावधान करता है। इसके तहत राष्ट्रीय गान को जानबूझकर गाने से रोकना या उसके गायन में जुटी सभा में व्यवधान पैदा करना अपराध है। 2026 के संशोधन के जरिए इसी प्रावधान का विस्तार वंदे मातरम् तक किया गया है।
वंदे मातरम् के गायन में बाधा डालना होगा अपराध
नए कानून का सबसे अहम पहलू यह है कि अब किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर वंदे मातरम् के गायन को रोकने या उसके गायन में जुटी सभा में व्यवधान पैदा करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
इसका मतलब यह है कि कानून का फोकस केवल गीत के प्रति सामान्य असम्मान पर नहीं, बल्कि कानून में निर्धारित जानबूझकर किए गए अपमान या गायन में बाधा जैसे कृत्यों पर होगा। इसलिए हर ऐसी स्थिति को स्वतः अपराध नहीं माना जाएगा, बल्कि मामले के तथ्यों और कानून में तय शर्तों के आधार पर कार्रवाई होगी।
क्या होगी सजा?
PRS Legislative Research के अनुसार, संशोधन विधेयक ने वंदे मातरम् को उन प्रावधानों के दायरे में शामिल किया है, जिनके तहत राष्ट्रीय गान के गायन को जानबूझकर रोकना या उसमें व्यवधान डालना दंडनीय है। ऐसे अपराध में तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। दूसरी और उसके बाद की दोषसिद्धि के लिए कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान भी लागू होता है।
इस तरह अब वंदे मातरम् से जुड़े गंभीर अपमान या व्यवधान के मामलों में पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का स्पष्ट वैधानिक आधार मौजूद होगा।
1971 के कानून में हुआ बड़ा बदलाव
Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 देश के प्रमुख राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान की रक्षा करने वाला कानून है। इसके तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान से जुड़े कुछ कृत्यों को अपराध माना गया है।
2026 का संशोधन इसी कानून के दायरे को बढ़ाता है। सरकार की ओर से विधेयक लाने का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत को भी वैधानिक सुरक्षा प्रदान करना था। विधेयक के पारित होने के बाद अब वंदे मातरम् को लेकर भी स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान लागू हो गया है।
राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान में अंतर
देश में ‘जन गण मन’ राष्ट्रीय गान है, जबकि ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय गीत है। दोनों का स्वतंत्रता आंदोलन और भारतीय राष्ट्रवाद के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
नए कानून के बाद दोनों को कानूनी संरक्षण के एक खास पहलू में समानता मिलेगी, लेकिन इससे वंदे मातरम् का संवैधानिक या आधिकारिक दर्जा राष्ट्रीय गान के रूप में नहीं बदलता। संशोधन मुख्य रूप से 1971 के कानून में वंदे मातरम् को शामिल करने से संबंधित है।
क्यों पड़ी इस कानून की जरूरत?
केंद्र सरकार का तर्क रहा है कि राष्ट्रीय गीत देश की स्वतंत्रता की लड़ाई और राष्ट्रीय चेतना से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद 1971 के कानून में राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालने या उसके अपमान के लिए राष्ट्रीय गान जैसी स्पष्ट दंडात्मक व्यवस्था नहीं थी।
संशोधन के जरिए इसी कानूनी अंतर को खत्म किया गया है। अब वंदे मातरम् से संबंधित निर्धारित कृत्यों के लिए भी कानून में स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान मौजूद होंगे।
राजनीतिक बहस के बीच कानून
वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने का मुद्दा संसद में राजनीतिक बहस का विषय भी रहा। सरकार ने इसे राष्ट्रीय सम्मान और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़कर देखा, जबकि विपक्ष की ओर से इसके विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाए गए।
राज्यसभा में विधेयक पारित होने के दौरान भी सदन में राजनीतिक गतिरोध देखने को मिला था। इसके बावजूद विधेयक को मंजूरी मिली और अब राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह कानून का रूप ले चुका है।
अब आगे क्या बदलेगा?
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद संशोधित कानून लागू होने के साथ वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या कानून के तहत परिभाषित अपमान के मामलों में दंडात्मक कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
हालांकि, कानून का इस्तेमाल करते समय यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि किसी घटना में वास्तव में जानबूझकर व्यवधान या अपमान हुआ है या नहीं। केवल किसी व्यक्ति का गीत न गाना और किसी सभा के गायन को जानबूझकर बाधित करना कानूनी रूप से एक जैसी स्थिति नहीं मानी जा सकती। नए कानून की व्याख्या और उसका वास्तविक अनुप्रयोग आने वाले मामलों में और स्पष्ट होगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के साथ अब वंदे मातरम् को लेकर देश में एक स्पष्ट वैधानिक सुरक्षा व्यवस्था स्थापित हो गई है। सरकार इसे राष्ट्रीय सम्मान और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है। वहीं, कानून के लागू होने के बाद इसकी व्यावहारिक व्याख्या और इस्तेमाल पर भी नजर रहेगी।





